मेरा प्रिय आदर्श व्यक्ति। मुहम्मद (सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम)
प्रस्तावना- हमारा देश महान स्त्रियों
और पुरुषों का देश है जिन्होंने देश के लिए ऐसे आदर्श कार्य किए हैं जिन्हें भारतवासी
सदा याद रखेंगे। कई महापुरुषों ने हमारी आजादी की लड़ाई में अपना तन-मन-धन परिवार सब
कुछ अर्पण कर दिया। ऐसे ही महापुरुषों में से एक थे महात्मा गांधी। उन्होंने मेरे आदर्श व्यक्ति के बारे में कहा की। ..
अब मुझे पहले से भी ज़्यादा विश्वास हो गया है
कि यह तलवार की शक्ति न थी जिसने इस्लाम के लिए विश्व क्षेत्रा में विजय प्राप्त की, बल्कि यह इस्लाम के पैग़म्बर का अत्यन्त सादा जीवन, आपकी निःस्वार्थता, प्रतिज्ञा-पालन और निर्भयता
थी, आपका अपने मित्रों और अनुयायियों से प्रेम करना और ईश्वर पर
भरोसा रखना था। यह तलवार की शक्ति नहीं थी, बल्कि ये सब विशेषताएं और
गुण थे जिनसे सारी बाधाएं दूर हो गयीं और आपने समस्त कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर
ली।
आइए ज़रा इस महान व्यक्ति की जीवनी पर एक दृष्टि
डाल कर देखते हैं कि ऐसा कैसे हुआ?
बचपन एवं शिक्षा- इस महापुरुष का जन्म 20
अप्रैल 571 ई0 में मक्का शहर के एक प्रतिष्ठित वंश में हुवा. जन्म के पूर्व ही आपके
पिता का देहांत हो गया। आपकी माता आमिना (संध्या) धार्मिक स्वभाव वाली अत्यंत सरल सौशील महिला थी। आप बचपन से बड़े ही काम के
अच्छे और बात के सच्चे व्यक्ति थे।
आपका नाम यधपि मुहम्मद था परन्तु इन्हीं गुणों के कारण लोग आपको «सत्यवादी»तथा «अमानतदार» की अपाधि से पुकारते थे। आपकी जीवनी बाल्यावस्था हो कि किशोरावस्था
हर प्रकार के दाग़ से शुद्ध एंव उज्जवल थी।
सिद्धांत- जब आपकी आयु चालीस वर्ष की हो गई तो ईश्वर ने मानव-मार्गदर्शन
हेतु आपको संदेष्टा बनाया,आपके पास आकाशीय दूत जिब्रील अलै0 आए और उन्हों
ने ईश्वर की वाणी क़ुरआन पढ़ कर आपको सुनाया। यहीं से क़ुरआन के अवतरण का आरम्भ हुआ, जो इश्वर की वाणी है, मानव-रचना नहीं। इसी के
साथ आपको ईश्दुतत्व के पद पर भी आसीन कर दिया गया। फिर आपको आदेश दिया गया कि मानव
का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार हो जाएं। अतः आपने लोगों को बुराई से रोका। जुआ, शराब, व्यभिचार, और बेहयाई से मना किया।
उच्च आचरण और नैतिकता की शिक्षा दी, एक ईश्वर का संदेश देते
हुआ कहा कि «हे लोगो! एक ईश्वर की पूजा करो, सफल हो जा ओगे» सज्जन लोगों ने आपका अनुसरण
किया और एक ईश्वर के नियमानुसार जीवन बिताने लगे। मुहम्मद जी ने समाज में मौजूद बुराईयों से विरोध
प्रकट करने के लिए कालिमा ए तौहीद अपना
प्रमुख अस्त्र बनाया। आप के द्वारा एक ऐसे नए राज्य की स्थापना हुई जो मराकश से ले
कर इंडीज़ तक फैला और जिसने तीन महाद्वीपों – एशिया, अफ्रीक़ा, और यूरोप- के विचार और जीवन पर अपना असर डाला।
ऐसा क्यूँकर हुवा?
वह महान व्यक्ति जिन्होंने बेकसों की दस्तगीरी की,
वह महान व्यक्ति जिन्होंने असरारे, मोहब्बत समझाये,
वह महान व्यक्ति जिन्होंने
ज़ख्म खा कर फूल बरसाये,
वह महान व्यक्ति जिन्होंने गालियाँ सुन कर दुआएं दी,
वह महान व्यक्ति - टूटा__बोरिया जिसकाबिछोना था,
वह महान व्यक्ति जिन्होंने ज़िन्दगी के राज़ समझाए,
वह महान व्यक्ति जिन्होंनेबादशाही में फकीरी की...!
वह महान व्यक्ति जिन्होंने जन्नत को माँ के खादमों तले बतलाया
वह महान व्यक्ति जिन्होंने
बड़ों का अदब और बच्चों से प्रेम सिखाया
उपसंहार- मुहम्मद नबी
ने सत्य, प्रेम और भाईचारे की भावना से दुन्या की जनता के हृदय पर राज किया। आज उनके मानने वाले
दुन्या भर में 170 करोड़ हैं.
63 साल
की उम्र में आप अल्लाह को प्यारे होगये। वह हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके आदर्श सिद्धांत हमें सदैव याद रहेंगे। उनका नाम अमर
रहेगा।

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ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు