Tuesday, October 29, 2019
Priya Pravakta muhammad (PBUH) Pratyekatalu - ప్రియ ప్రవక్త ముహమ్మద్ (స)...
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Priya Pravakta muhammad (PBUH) Pratyekatalu - ప్రియ ప్రవక్త ముహమ్మద్ (స)...
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Wednesday, September 4, 2019
ప్రతి ఒక్కరు ముహర్రం గురించి తెలుసుకోవలసిన విషయాలు - అల్లాహ్ మాసం ముహర్రం
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Sunday, September 1, 2019
मेरी अविस्मरणीय यात्रा
मेरी अविस्मरणीय यात्रा
सय्यिद हफीजुल्लाह
हमारे जीवन में कछ अनुभव ऐसे होते हैं जो बहुत समय तक हमारे
मन से नहीं उतरते। ऐसे अनुभव अत्यंत रोमांचक होते हैं।
वह 2017 अप्रैल का महीना था. मैं अपने परिवार
समेत उमरः करने केलिए रवाना हुवा। मेरे साथ मेरा बड़ा बाई हसन और बहिन हनान भी थी.
हम कुवैत से 24 घंटे की मसाफ़त तै करके खरनुल मनाज़िन पहुंचे।
ये ो जगह है जहां से कुवैत से हज उमरा इहराम
बांधते हैं. हम वहाँ पहुंचकर पिता की निगरानी
में शनान किया और दो सफ़ेद कपडे इहराम के पहनकर '"लब्बैक अल्लहुमा लब्बैक
"का विरद करते हुवे मक्काः की और चल पड़े. मक्के में होटल से फारिग होकर काबह की और उमराह करने केलिए निकले।
मक्काः बहुत ही महिमा वाली धरती है, यहां की एक मस्जि जिसका नाम खैफ है उसमें 70 नबियों ने नमाज़ पढ़ी. ये पुण्य भूमि
तमाम दुन्या वालों केलिए मार्गदर्शक केंद्र है. और जब तक मक्काः में मौजूद काबह (अल्लाह
का पहला घर) है तब तक दुन्या रहेगी। ये स्थल हबूत ही सुरक्षित और शान्ति पूर्वक है.
यहां के निष्ठा नियम बहुत ही भक्तिपूर्वक होते हैं, यहां एक बार जाने वाला
बार बार जाने की तमन्ना करता है.
मैं बहुत कुश था के अब कुछ ही देर में काबह
को देखने वाला हूँ. जब मेरी नज़र कबः पड़ी मैं मदहोस सा होगया, क्या करना है मुझे कुछ याद नहीं रहा , मेरे माता और पिता थे जो मेरा हाथ पकड़
कर उमराह करवाया। मैं तवाफ़ के दौरान काबह को देखते रह गया, काबह के बराबर सातवें आसमान पर बैतूल मामूर है, जैसा इनसानो केलिए ज़मीन
में काबह है वैसे फरिश्तों केलिए आसमान में बैतूल मामूर है. और बैतूल मामूर के सीधे
में ऊपर जन्नत है, और सृष्टि में सैम से ऊपर अल्लाह का अर्श है, उससे ऊपर कोई नहीं। तवाफ़
के बाद मैंने मक़ाम इब्राहीम के पास 2 नमाज़ अदा किया, और फिर ज़मज़म पवित्र जल का सेवन किया। ये पूरी
सबसे शुद्ध और शुभ,
स्वच्छ पानी है. इसके पेट वक़्त जोभी अच्छी मनो कामना होगी अल्लाह
उसको ज़रूर पूरा करेंगे। उसके बाद मैंने साफा और मारवाह दो पहाड़ियों के दरमियान साई
रस्म पूरी की, और बाल निकाल कर उमराह पूरा किया अल्हम्दु लिल्लाह। सावधान के साथ आप सभी ने मेरी
यात्रा सुनी , आप सब का धन्यवाद करता हूँ,
Thursday, August 29, 2019
मेरा प्रिय आदर्श व्यक्ति। मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)
मेरा प्रिय आदर्श व्यक्ति। मुहम्मद (सल्लल्लाहु
अलैहि व सल्लम)
प्रस्तावना- हमारा देश महान स्त्रियों
और पुरुषों का देश है जिन्होंने देश के लिए ऐसे आदर्श कार्य किए हैं जिन्हें भारतवासी
सदा याद रखेंगे। कई महापुरुषों ने हमारी आजादी की लड़ाई में अपना तन-मन-धन परिवार सब
कुछ अर्पण कर दिया। ऐसे ही महापुरुषों में से एक थे महात्मा गांधी। उन्होंने मेरे आदर्श व्यक्ति के बारे में कहा की। ..
अब मुझे पहले से भी ज़्यादा विश्वास हो गया है
कि यह तलवार की शक्ति न थी जिसने इस्लाम के लिए विश्व क्षेत्रा में विजय प्राप्त की, बल्कि यह इस्लाम के पैग़म्बर का अत्यन्त सादा जीवन, आपकी निःस्वार्थता, प्रतिज्ञा-पालन और निर्भयता
थी, आपका अपने मित्रों और अनुयायियों से प्रेम करना और ईश्वर पर
भरोसा रखना था। यह तलवार की शक्ति नहीं थी, बल्कि ये सब विशेषताएं और
गुण थे जिनसे सारी बाधाएं दूर हो गयीं और आपने समस्त कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर
ली।
आइए ज़रा इस महान व्यक्ति की जीवनी पर एक दृष्टि
डाल कर देखते हैं कि ऐसा कैसे हुआ?
बचपन एवं शिक्षा- इस महापुरुष का जन्म 20
अप्रैल 571 ई0 में मक्का शहर के एक प्रतिष्ठित वंश में हुवा. जन्म के पूर्व ही आपके
पिता का देहांत हो गया। आपकी माता आमिना (संध्या) धार्मिक स्वभाव वाली अत्यंत सरल सौशील महिला थी। आप बचपन से बड़े ही काम के
अच्छे और बात के सच्चे व्यक्ति थे।
आपका नाम यधपि मुहम्मद था परन्तु इन्हीं गुणों के कारण लोग आपको «सत्यवादी»तथा «अमानतदार» की अपाधि से पुकारते थे। आपकी जीवनी बाल्यावस्था हो कि किशोरावस्था
हर प्रकार के दाग़ से शुद्ध एंव उज्जवल थी।
सिद्धांत- जब आपकी आयु चालीस वर्ष की हो गई तो ईश्वर ने मानव-मार्गदर्शन
हेतु आपको संदेष्टा बनाया,आपके पास आकाशीय दूत जिब्रील अलै0 आए और उन्हों
ने ईश्वर की वाणी क़ुरआन पढ़ कर आपको सुनाया। यहीं से क़ुरआन के अवतरण का आरम्भ हुआ, जो इश्वर की वाणी है, मानव-रचना नहीं। इसी के
साथ आपको ईश्दुतत्व के पद पर भी आसीन कर दिया गया। फिर आपको आदेश दिया गया कि मानव
का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार हो जाएं। अतः आपने लोगों को बुराई से रोका। जुआ, शराब, व्यभिचार, और बेहयाई से मना किया।
उच्च आचरण और नैतिकता की शिक्षा दी, एक ईश्वर का संदेश देते
हुआ कहा कि «हे लोगो! एक ईश्वर की पूजा करो, सफल हो जा ओगे» सज्जन लोगों ने आपका अनुसरण
किया और एक ईश्वर के नियमानुसार जीवन बिताने लगे। मुहम्मद जी ने समाज में मौजूद बुराईयों से विरोध
प्रकट करने के लिए कालिमा ए तौहीद अपना
प्रमुख अस्त्र बनाया। आप के द्वारा एक ऐसे नए राज्य की स्थापना हुई जो मराकश से ले
कर इंडीज़ तक फैला और जिसने तीन महाद्वीपों – एशिया, अफ्रीक़ा, और यूरोप- के विचार और जीवन पर अपना असर डाला।
ऐसा क्यूँकर हुवा?
वह महान व्यक्ति जिन्होंने बेकसों की दस्तगीरी की,
वह महान व्यक्ति जिन्होंने असरारे, मोहब्बत समझाये,
वह महान व्यक्ति जिन्होंने
ज़ख्म खा कर फूल बरसाये,
वह महान व्यक्ति जिन्होंने गालियाँ सुन कर दुआएं दी,
वह महान व्यक्ति - टूटा__बोरिया जिसकाबिछोना था,
वह महान व्यक्ति जिन्होंने ज़िन्दगी के राज़ समझाए,
वह महान व्यक्ति जिन्होंनेबादशाही में फकीरी की...!
वह महान व्यक्ति जिन्होंने जन्नत को माँ के खादमों तले बतलाया
वह महान व्यक्ति जिन्होंने
बड़ों का अदब और बच्चों से प्रेम सिखाया
उपसंहार- मुहम्मद नबी
ने सत्य, प्रेम और भाईचारे की भावना से दुन्या की जनता के हृदय पर राज किया। आज उनके मानने वाले
दुन्या भर में 170 करोड़ हैं.
63 साल
की उम्र में आप अल्लाह को प्यारे होगये। वह हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके आदर्श सिद्धांत हमें सदैव याद रहेंगे। उनका नाम अमर
रहेगा।
Tuesday, August 27, 2019
इन्सानी भाईचारा और इस्लाम
इन्सानी भाईचारा और इस्लाम पर महात्मा गाधी का ब्यानः ‘‘कहा जाता है कि यूरोप वाले दक्षिणी अफ्रीका में इस्लाम के प्रसार से भयभीत हैं, उस इस्लाम से जिसने स्पेन को सभ्य बनाया, उस इस्लाम से जिसने मराकश तक रोशनी पहुँचाई और संसार को भाईचारे की इंजील पढाई। दक्षिणी अफ्रीका के यूरोपियन इस्लाम के फैलाव से बस इसलिए भयभीत हैं कि उनके अनुयायी गोरों के साथ कहीं समानता की माँग न कर बैठें। अगर ऐसा है तो उनका डरना ठीक ही है। यदि भाईचारा एक पाप है, यदि काली नस्लों की गोरों से बराबरी ही वह चीज है, जिससे वे डर रहे हैं, तो फिर (इस्लाम के प्रसार से) उनके डरने का कारण भी समझ में आ जाता है।’’
इन्सानी भाईचारा और इस्लाम पर महात्मा गाधी का ब्यानः पृष्ठ 13, प्रो. के. एस. रामाकृष्णा राव की मधुर संदेश संगम, दिल्ली से छपी पुस्तक ‘‘इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) में
खुदा के समक्ष रंक और राजा सब एक समान
इस्लाम के इस पहलू पर विचार व्यकत करते हुए सरोजनी नायडू कहती हैं-
‘‘यह पहला धर्म था जिसने जम्हूरियत (लोकतंत्र) की शिक्षा दी और उसे एक व्यावहारिक रूप दिया। क्योंकि जब मीनारों से अज़ाद दी जाती है और इबादत करने वाले मस्जिदों में जमा होते हैं तो इस्लाम की जम्हूरियत (जनतंत्र) एक दिन में पाँच बार साकार होती है, जब रंक और राजा एक-दूसरे से कंधे से कंधा मिला कर खडे होते हैं और पुकारते हैं, ‘अल्लाहु अकबर’ यानी अल्लाह ही बडा है। मैं इस्लाम की इस अविभाज्य एकता को देख कर बहुत प्रभावित हुई हूँ, जो लोगों को सहज रूप में एक-दूसरे का भाई बना देती है। जब आप एक मिस्री, एक अलजीरियाई, एक हिन्दुस्तानी और एक तुर्क (मुसलमान) से लंदन में मिलते हैं तो आप महसूस करेंगे कि उनकी निगाह में इस चीज़ का कोई महत्व नहीं है कि एक का संबंध मिस्र से है और एक का वतन हिन्दूस्तान आदि है।’’ पृष्ठ 12
विश्व प्रसिद्ध शायर गोयटे ने पवित्र कुरआन के बारे में एलान किया थाः ‘‘यह पुस्तक हर युग में लोगों पर अपना अत्यधिक प्रभाव डालती रहेगी।’’ पृष्ठ 16
जार्ज बर्नाड शा का भी कहना हैः
‘‘अगर अगले सौ सालों में इंग्लैंड ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप परकिसी धर्म के शासन करने की संभावना है तो वह इस्लाम है।’’
2
‘बर्नार्ड शा’ अपनी किताब ‘इस्लाम सौ साल के बाद’ में कहता हैः पूरी दुनिया शीघ्र ही इस्लाम को स्वीकार कर लेगी। अगर वह उसे उसके स्पष्ट नाम के साथ स्वीकार न करेतो उसे ( किसी दूसरे) नाम से अवश्य स्वीकार करेगी। एक दिन ऎसा आएगा कि पश्चिम केलोग इस्लाम धर्म को गले से लगाएंगे। पश्चिम पर कई सदियाँ गुज़र चुकी हैं और वह इस्लामके संबंध में झूठ से भरी हुई किताबें पढ़ता चला आ रहा है। मैं ने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बारे में एक किताब लिखी थी किन्तु अंग्रेज कीरीतियों और परम्पराओं से हट कर होने के कारण वह ज़ब्त कर ली गई।
प्रोफेसर ‘कीथ मोरे’ अपनी किताब (The developing human)में कहते हैं: मुझे यह बात स्वीकारने में कोई कठिनाई नहीं होती किक़ुरआन अल्लाह का कलाम (कथन) है,क्योंकि क़ुरआन में जनीन (गर्भस्थ) के जो विश्वरण दियेगए हैं उनका सातवीं शताब्दी की वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित होना असम्भव है। एकमात्र उचित परिणाम (निष्कर्ष) यह है कि यह विवरण मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम को अल्लाह की ओर से व (ईश्वाणी) किये गये थे।
‘इन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका’ में उल्लिखित है -‘‘समस्त पैग़म्बरों और धार्मिक क्षेत्र के महान व्यक्तित्वों में मुहम्मद सबसे ज़्यादा सफल हुए हैं।’’ पृष्ठ 21
‘‘अगर अगले सौ सालों में इंग्लैंड ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप परकिसी धर्म के शासन करने की संभावना है तो वह इस्लाम है।’’
2
‘बर्नार्ड शा’ अपनी किताब ‘इस्लाम सौ साल के बाद’ में कहता हैः पूरी दुनिया शीघ्र ही इस्लाम को स्वीकार कर लेगी। अगर वह उसे उसके स्पष्ट नाम के साथ स्वीकार न करेतो उसे ( किसी दूसरे) नाम से अवश्य स्वीकार करेगी। एक दिन ऎसा आएगा कि पश्चिम केलोग इस्लाम धर्म को गले से लगाएंगे। पश्चिम पर कई सदियाँ गुज़र चुकी हैं और वह इस्लामके संबंध में झूठ से भरी हुई किताबें पढ़ता चला आ रहा है। मैं ने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बारे में एक किताब लिखी थी किन्तु अंग्रेज कीरीतियों और परम्पराओं से हट कर होने के कारण वह ज़ब्त कर ली गई।
प्रोफेसर ‘कीथ मोरे’ अपनी किताब (The developing human)में कहते हैं: मुझे यह बात स्वीकारने में कोई कठिनाई नहीं होती किक़ुरआन अल्लाह का कलाम (कथन) है,क्योंकि क़ुरआन में जनीन (गर्भस्थ) के जो विश्वरण दियेगए हैं उनका सातवीं शताब्दी की वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित होना असम्भव है। एकमात्र उचित परिणाम (निष्कर्ष) यह है कि यह विवरण मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम को अल्लाह की ओर से व (ईश्वाणी) किये गये थे।
‘इन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका’ में उल्लिखित है -‘‘समस्त पैग़म्बरों और धार्मिक क्षेत्र के महान व्यक्तित्वों में मुहम्मद सबसे ज़्यादा सफल हुए हैं।’’ पृष्ठ 21
प्रेमचंद जी ‘‘इस्लामी सभ्यता’’ पुस्तिका जो मधुर संदेश संगम, दिल्ली से भी छपी है, में लिखते हैं:
‘‘जहां तक हम जानते हैं कि किसी धर्म ने न्याय को इतनी महानता नहीं दी जितनी इस्लाम ने।’’ पृष्ठ 5
‘संसार की किसी सभ्य से सभ्य जाति की न्याय-नीति की इस्लामी न्याय-नीति से तुलना कीजिए, आप इस्लाम का पल्ला झुकता हुआ पाएँगे।’’ पृष्ठ 7
‘‘हिन्दू-समाज ने भी शूद्रों की रचना करके अपने सिर कलंक का टीका लगा लिया। पर इस्लाम पर इसका धब्बा तक नहीं। गुलामी की प्रथा तो उस समस्त संसार में भी, लेकिन इस्लाम ने गुलामों के साथ जितना अच्छा सलूक किया उस पर उसे गर्व हो सकता है।’’ पृष्ठ 10
‘‘हमारे विचार में वही सभ्यता श्रेष्ठ होने का दावा कर सकती है जो व्यक्ति को अधिक से अधिक उठने का अवसर दे। इस लिहाज से भी इस्लामी सभ्यता को कोई दूषित नहीं ठहरा सकता।’’ पृष्ठ 11
‘‘हम तो याहं तक कहने को तैयार हैं कि इस्लाम में जनता को आकर्षित करने की जितनी बडी शक्ति है उतनी और किसी सस्था में नही है। जब नमाज़ पढते समय एक मेहतर अपने को शहर के बडे से बडे रईस के साथ एक ही कतार में खडा पाता है तो क्या उसके हृदय में गर्व की तरंगे न उठने लगती होंगी। उसके विरूद्ध हिन्दू समाज न जिन लोगों को नीच बना दिया है उनको कुएं की जगत पर भी नहीं चढने देता, उन्हें मंदिरों में घुसने नहीं देता।’’ पृष्ठ 14
‘‘जहां तक हम जानते हैं कि किसी धर्म ने न्याय को इतनी महानता नहीं दी जितनी इस्लाम ने।’’ पृष्ठ 5
‘संसार की किसी सभ्य से सभ्य जाति की न्याय-नीति की इस्लामी न्याय-नीति से तुलना कीजिए, आप इस्लाम का पल्ला झुकता हुआ पाएँगे।’’ पृष्ठ 7
‘‘हिन्दू-समाज ने भी शूद्रों की रचना करके अपने सिर कलंक का टीका लगा लिया। पर इस्लाम पर इसका धब्बा तक नहीं। गुलामी की प्रथा तो उस समस्त संसार में भी, लेकिन इस्लाम ने गुलामों के साथ जितना अच्छा सलूक किया उस पर उसे गर्व हो सकता है।’’ पृष्ठ 10
‘‘हमारे विचार में वही सभ्यता श्रेष्ठ होने का दावा कर सकती है जो व्यक्ति को अधिक से अधिक उठने का अवसर दे। इस लिहाज से भी इस्लामी सभ्यता को कोई दूषित नहीं ठहरा सकता।’’ पृष्ठ 11
‘‘हम तो याहं तक कहने को तैयार हैं कि इस्लाम में जनता को आकर्षित करने की जितनी बडी शक्ति है उतनी और किसी सस्था में नही है। जब नमाज़ पढते समय एक मेहतर अपने को शहर के बडे से बडे रईस के साथ एक ही कतार में खडा पाता है तो क्या उसके हृदय में गर्व की तरंगे न उठने लगती होंगी। उसके विरूद्ध हिन्दू समाज न जिन लोगों को नीच बना दिया है उनको कुएं की जगत पर भी नहीं चढने देता, उन्हें मंदिरों में घुसने नहीं देता।’’ पृष्ठ 14
स्नेह और सहिष्णुता के प्रचारक स्वामी विवेकानन्द कहते हैं ‘‘पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम संसार मे समानता के संदेशवाहक थे। वे मानवजाति में स्नेह और सहिष्णुता के प्रचारक थे। उनके धर्म में जाति-बिरादरी, समूह, नस्ल आदि का कोई स्थान नहीं है।’’
स्वामी विवेकानन्द इस्लाम के बड़े प्रशंसक और इसके भाईचारा के सिद्धांत से अभिभूत थे। वेदान्ती मस्तिष्क और इस्लामी शरीर को वह भारत की मुक्ति का मार्ग मानते थे। अल्मोड़ा से दिनांक 10 जून 1898 को अपने एक मित्र नैनीताल के मुहम्मद सरफ़राज़ हुसैन को भेजे पत्र में उन्होंने लिखा कि
‘‘अपने अनुभव से हमने यह जाना है कि व्यावहारिक दैनिक जीवन के स्तर पर यदि किसी धर्म के अनुयायियों ने समानता के सिद्धांत को प्रशंसनीय मात्र में अपनाया है तो वह केवल इस्लाम है। इस्लाम समस्त मनुष्य जाति को एक समान देखता और बर्ताव करता है। यही अद्वैत है। इसलिए हमारा यह विश्वास है कि व्यावहारिक इस्लाम की सहायता के बिना, अद्वैत का सिद्धांत चाहे वह कितना ही उत्तम और चमत्कारी हो विशाल मानव-समाज के लए बिल्कुल अर्थहीन है।’’विवेकानन्द साहित्य, जिल्द 5, पेज 415
स्वामी जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि
‘‘भारत में इस्लाम की ओर धर्म परिवर्तन तलवार (बल प्रयोग) या धोखाधड़ी या भौतिक साधन देकर नहीं हुआ था।’’विवेकानन्द साहित्य, जिल्द 8, पेज 330
स्वामी विवेकानन्द इस्लाम के बड़े प्रशंसक और इसके भाईचारा के सिद्धांत से अभिभूत थे। वेदान्ती मस्तिष्क और इस्लामी शरीर को वह भारत की मुक्ति का मार्ग मानते थे। अल्मोड़ा से दिनांक 10 जून 1898 को अपने एक मित्र नैनीताल के मुहम्मद सरफ़राज़ हुसैन को भेजे पत्र में उन्होंने लिखा कि
‘‘अपने अनुभव से हमने यह जाना है कि व्यावहारिक दैनिक जीवन के स्तर पर यदि किसी धर्म के अनुयायियों ने समानता के सिद्धांत को प्रशंसनीय मात्र में अपनाया है तो वह केवल इस्लाम है। इस्लाम समस्त मनुष्य जाति को एक समान देखता और बर्ताव करता है। यही अद्वैत है। इसलिए हमारा यह विश्वास है कि व्यावहारिक इस्लाम की सहायता के बिना, अद्वैत का सिद्धांत चाहे वह कितना ही उत्तम और चमत्कारी हो विशाल मानव-समाज के लए बिल्कुल अर्थहीन है।’’विवेकानन्द साहित्य, जिल्द 5, पेज 415
स्वामी जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि
‘‘भारत में इस्लाम की ओर धर्म परिवर्तन तलवार (बल प्रयोग) या धोखाधड़ी या भौतिक साधन देकर नहीं हुआ था।’’विवेकानन्द साहित्य, जिल्द 8, पेज 330
सी एस श्रीनिवास ‘‘हिस्ट्री आफ़ इंडिया’’ में, जो मद्रास से 1937 मे प्रकाशित हुई थी, लिखते हैं
‘‘इस्लाम के पैग़बर ने जब एक शासक का स्थान प्राप्त किया तो भी आपका जीवन पूर्व की भांति सादा रहा। आप सुधारक भी थे और विजेता भी। आपने लोगों के अख़्लाकष् को बुलंद किया। प्रतिशोध लेने को अनुचित ठहराया और खोज-बीन के बिना रक्तपात से रोका, विखंडित कष्बीलों को एक कषैम बना दिया और एक ऐसा रिश्ता दिया जो ख़ानदानी रिश्तों से ज़्यादा टिकाऊ था।आपने लोगों को पस्ती, द्वेष और पक्षपात में ग़र्क पाया, लेकिन उनको सदाकत का संदेश देकर बुलंद कर दिया। उनको आपसी ख़ानदानी झगड़े में लिप्त पाया, मगर सहिष्णुता और भ्रातृत्व के रिश्ते में जोड़ दिया। आप एक फ़रिश्ता-ए-रहमत बनकर दुनिया में तशरीफ़ लाए।’’भारतीय सभ्यता पर मुसलमानों के उपकार, पृष्ठ 31
‘‘इस्लाम के पैग़बर ने जब एक शासक का स्थान प्राप्त किया तो भी आपका जीवन पूर्व की भांति सादा रहा। आप सुधारक भी थे और विजेता भी। आपने लोगों के अख़्लाकष् को बुलंद किया। प्रतिशोध लेने को अनुचित ठहराया और खोज-बीन के बिना रक्तपात से रोका, विखंडित कष्बीलों को एक कषैम बना दिया और एक ऐसा रिश्ता दिया जो ख़ानदानी रिश्तों से ज़्यादा टिकाऊ था।आपने लोगों को पस्ती, द्वेष और पक्षपात में ग़र्क पाया, लेकिन उनको सदाकत का संदेश देकर बुलंद कर दिया। उनको आपसी ख़ानदानी झगड़े में लिप्त पाया, मगर सहिष्णुता और भ्रातृत्व के रिश्ते में जोड़ दिया। आप एक फ़रिश्ता-ए-रहमत बनकर दुनिया में तशरीफ़ लाए।’’भारतीय सभ्यता पर मुसलमानों के उपकार, पृष्ठ 31
आदर्श जीवनजगत महर्षि पै़ग़म्बरे-इस्लाम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के विषय में महात्मा गांधी के विचार इस तरह हैं
‘‘मैं पैग़म्बरे-इस्लाम की जीवनी का अध्ययन कर रहा था। जब मैंने किताब का दूसरा भाग भी ख़त्म कर लिया तो मुझे दुख हुआ कि इस महान प्रतिभाशाली जीवन का अध्ययन करने के लिए अब मेरे पास कोई और किताब बाकी नहीं। अब मुझे पहले से भी ज़्यादा विश्वास हो गया है कि यह तलवार की शक्ति न थी जिसने इस्लाम के लिए विश्व क्षेत्रा में विजय प्राप्त की, बल्कि यह इस्लाम के पैग़म्बर का अत्यन्त सादा जीवन, आपकी निःस्वार्थता, प्रतिज्ञा-पालन और निर्भयता थी, आपका अपने मित्रों और अनुयायियों से प्रेम करना और ईश्वर पर भरोसा रखना था। यह तलवार की शक्ति नहीं थी, बल्कि ये सब विशेषताएं और गुण थे जिनसे सारी बाधाएं दूर हो गयीं और आपने समस्त कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर ली।मुझसे किसी ने कहा था कि दक्षिण अफ्ऱीकष में जो यूरोपियन आबाद हैं, इस्लाम के प्रचार से कांप रहे हैं, उसी इस्लाम से जिसने मोरक्को में रौशनी फैलायी और संसार-निवासियों को भाई-भाई बन जाने का सुखद संवाद सुनाया। निःसन्देह दक्षिण अफ्ऱीका के यूरोपियन इस्लाम से नहीं डरते हैं, लेकिन वास्तव में वह इस बात से डरते हैं कि अगर इस्लाम कुबूल कर लिया तो वह श्वेत जातियों से बराबरी का अधिकार मांगने लगेंगे।आप उनको डरने दीजिए। अगर भाइ-भाई बनना पाप है, यदि वे इस बात से परेशान हैं कि उनका नस्ली बड़प्पन कायम न रह सके तो उनका डरना उचित है, क्योंकि मैंने देखा है कि अगर एक जूलो ईसाई हो जाता है तो वह सफ़ेद रंग के ईसाइयों के बराबर नहीं हो सकता। किन्तु जैसे ही वह इस्लाम ग्रहण करता है, बिल्कुल उसी वक्त वह उसी प्याले में पानी पीता है और उसी तश्तरी में खाना खाता है जिसमें कोई और मुसलमान पानी पीता और खाना खाता है, तो वास्तविक बात यह है जिससे यूरोपियन कांप रहे हैं।’’जगत महर्षि, पृष्ठ 2इन्सानियत फिर ज़िन्दा हुई
‘‘मैं पैग़म्बरे-इस्लाम की जीवनी का अध्ययन कर रहा था। जब मैंने किताब का दूसरा भाग भी ख़त्म कर लिया तो मुझे दुख हुआ कि इस महान प्रतिभाशाली जीवन का अध्ययन करने के लिए अब मेरे पास कोई और किताब बाकी नहीं। अब मुझे पहले से भी ज़्यादा विश्वास हो गया है कि यह तलवार की शक्ति न थी जिसने इस्लाम के लिए विश्व क्षेत्रा में विजय प्राप्त की, बल्कि यह इस्लाम के पैग़म्बर का अत्यन्त सादा जीवन, आपकी निःस्वार्थता, प्रतिज्ञा-पालन और निर्भयता थी, आपका अपने मित्रों और अनुयायियों से प्रेम करना और ईश्वर पर भरोसा रखना था। यह तलवार की शक्ति नहीं थी, बल्कि ये सब विशेषताएं और गुण थे जिनसे सारी बाधाएं दूर हो गयीं और आपने समस्त कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर ली।मुझसे किसी ने कहा था कि दक्षिण अफ्ऱीकष में जो यूरोपियन आबाद हैं, इस्लाम के प्रचार से कांप रहे हैं, उसी इस्लाम से जिसने मोरक्को में रौशनी फैलायी और संसार-निवासियों को भाई-भाई बन जाने का सुखद संवाद सुनाया। निःसन्देह दक्षिण अफ्ऱीका के यूरोपियन इस्लाम से नहीं डरते हैं, लेकिन वास्तव में वह इस बात से डरते हैं कि अगर इस्लाम कुबूल कर लिया तो वह श्वेत जातियों से बराबरी का अधिकार मांगने लगेंगे।आप उनको डरने दीजिए। अगर भाइ-भाई बनना पाप है, यदि वे इस बात से परेशान हैं कि उनका नस्ली बड़प्पन कायम न रह सके तो उनका डरना उचित है, क्योंकि मैंने देखा है कि अगर एक जूलो ईसाई हो जाता है तो वह सफ़ेद रंग के ईसाइयों के बराबर नहीं हो सकता। किन्तु जैसे ही वह इस्लाम ग्रहण करता है, बिल्कुल उसी वक्त वह उसी प्याले में पानी पीता है और उसी तश्तरी में खाना खाता है जिसमें कोई और मुसलमान पानी पीता और खाना खाता है, तो वास्तविक बात यह है जिससे यूरोपियन कांप रहे हैं।’’जगत महर्षि, पृष्ठ 2इन्सानियत फिर ज़िन्दा हुई
Monday, August 19, 2019
హజ్ నేర్పిన పాఠాలు
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Tuesday, August 6, 2019
ప్రవక్త ఇబ్రాహీం అలైహిస్సలాం వారి జీవిత పాఠాలు
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
మానవ జాతికి మేలిమి మలుపునిచ్చిన మహా మనీషి ప్రవక్త ఇబ్రాహీం అలైహిస్సలాం
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
హజ్జ్ పరిచయం
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
కాబః విశిష్టత - 2
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
కాబః విశిష్టత - 1
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
కాబః విశిష్టత - 1
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Monday, July 8, 2019
మహా ప్రవక్త ముహమ్మద్ (స) వారి మహితోక్తులు
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
మహా ప్రవక్త ముహమ్మద్ (స) వారి మహితోక్తులు
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
మహా ప్రవక్త ముహమ్మద్ (స) వారి మహితోక్తులు
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Sunday, June 30, 2019
_హజ్రత్ ఆదం(అలైహి) జీవిత పాఠాలు_
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
హజ్రత్ ఇబ్రాహీమ్ (అలైహి) జీవిత పాఠాలు
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Wednesday, May 22, 2019
ఖురాన్ హితోక్తులు
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
ఖురాన్ హితోక్తులు
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
ఖురాన్ మాసం
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
ఖురాన్ హితోక్తులు
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Tuesday, May 21, 2019
తరావేహ్ విశిష్టత
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
ఉపవాస గౌరవ స్థాయి
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
ఉపవాసాన్ని కాపాడుకోవడం ఎలా
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Sunday, May 19, 2019
ఉపవాసం నుండి మినహాయింపు ఎవరికి
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
ఉపవాస గౌరవ స్థాయి
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
ఉపవాస పరమార్థం
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
సత్కారాల సమాహారం రమజాన్
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Wednesday, May 8, 2019
ఉపవాస పరమార్థం
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
islami bhaicharagi
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Monday, May 6, 2019
సత్కారాల సమాహారం రమజాన్
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
Sunday, May 5, 2019
ఓ మనిషీ! నిన్ను నువ్వు గుర్తించు!
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
రమజాన్ పరిచయం
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
జకాత్ పరిచయం
ధనం, ఐశ్వర్యం, పొలం వారసత్వంగా లభించ వచ్చేమోగానీ, ఇస్లాం మాత్రం వారసత్వంగా లభించేది కాదు
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